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राजिम की तर्ज पर कर्णेश्वर मेले में मांस-मदिरा बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग तेज, प्रशासन से सकारात्मक पहल की उम्मीद


धमतरी डेस्क - धमतरी जिले की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक श्री कर्णेश्वर महादेव मेला महोत्सव 2026 1 फरवरी से 5 फरवरी तक आयोजित होने जा रहा है। मेले से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से राजिम की तर्ज पर कड़े कदम उठाने की मांग तेज कर दी है। प्रमुख मांग है कि मेला अवधि के दौरान मांस-मटन और मदिरा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि धार्मिक वातावरण की पवित्रता बनी रहे।

कर्णेश्वर महादेव धाम में आयोजित यह मेला हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है माघ पूर्णिमा के अवसर पर भक्त संगम तट से जल भरकर भगवान कर्णेश्वर नाथ को अर्पित करते हैं और स्नान-दान के साथ मेले का आनंद उठाते हैं। यह आयोजन जिले की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी बड़ा प्रतीक माना जाता है।

📢 श्रद्धालुओं की स्पष्ट मांग - पवित्रता बनाए रखने कड़े फैसले जरूरी
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मेले के दौरान खुलेआम मांस-मटन की बिक्री होती है और आसपास मदिरा दुकानों का संचालन भी जारी रहता है, जिससे धार्मिक आस्था प्रभावित होती है ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की है कि 

मेला अवधि में 5 किमी परिधि में मांस बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए पशुवध गृह अस्थायी रूप से बंद किए जाएं

शराब दुकानों का संचालन पांच दिनों के लिए रोका जाए
लोगों का कहना है कि आस्था के इतने बड़े केंद्र में इन गतिविधियों पर रोक लगना जरूरी है, ताकि धार्मिक माहौल की गरिमा बनी रहे।

🔔 राजिम कल्प कुंभ की तर्ज पर प्रतिबंध लागू करने की मांग 
श्रद्धालु उदाहरण दे रहे हैं कि राजिम कुंभ मेला के दौरान शासन द्वारा मांस बिक्री और पशुवध पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया जाता है, जिसका सख्ती से पालन भी कराया जाता है। इसी आधार पर अब कर्णेश्वर महादेव मेला महोत्सव में भी समान नियम लागू करने की मांग उठ रही है।

🗣️ न्यूज स्पेशल की पहल पर कलेक्टर का आश्वासन
न्यूज स्पेशल की टीम ने इस मुद्दे पर धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा से चर्चा की कलेक्टर ने सामाजिक व धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस पहल की सराहना की और पूरे विषय पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

🎯 प्रशासन से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद

कर्णेश्वर महादेव मेला न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि जिले की प्रतिष्ठा और गौरव से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में श्रद्धालु उम्मीद जता रहे हैं कि प्रशासन आस्था और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेगा।

फिलहाल ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की ओर से एक ही स्वर उठ रहा है—राजिम की तर्ज पर कर्णेश्वर मेले में भी मांस-मदिरा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाए, ताकि मेले की पवित्रता और गरिमा बनी रहे।
                            मिश्रा जी की कलम से 🖊️....

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