🚨 आंदोलन से मिली मंजूरी
इस पुल की मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन 15 सितंबर 2025 को मामला उस वक्त गरमा गया जब काजल नदी में बाढ़ के दौरान एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। इसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया।स्थिति को संभालते हुए कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने ग्रामीणों से चर्चा की और उनकी मांग को शासन तक पहुंचाया। आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ—और अब वही वादा हकीकत में बदलता दिख रहा है।
🌧️ बारिश में कट जाता था संपर्क
काजल नदी पर पुल नहीं होने के कारण हर साल बारिश में हालात बेहद खराब हो जाते थे—
गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता था
बच्चे पढ़ाई के लिए दूसरे गांव नहीं जा पाते थे
मरीजों और आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती थी
ग्राम पंचायत मोहरा, बोईरगांव, मुनाईकेरा समेत करीब 15 गांवों के हजारों लोगों को अब सीधा फायदा मिलेगा।
🌿 टूरिज्म को मिलेगा बूस्ट
जबर्रा क्षेत्र प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर है—
घने साल और सागौन के जंगल
होम स्टे और इको-टूरिज्म की संभावनाएं
औषधीय खेती और प्रसिद्ध “नगरी दुबराज” चावल
पुल बनने के बाद यह इलाका टूरिज्म हब के रूप में तेजी से उभरेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
एक पुल नहीं, यह 15 गांवों की जिंदगी बदलने वाला फैसला है—जहां अब डर नहीं, विकास की राह बहेगी।
मिश्रा जी की कलम 🖋️.... से 9575560069

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