मामला किसी आम लेन-देन का नहीं, बल्कि काम और ‘गिफ्ट’ के रिश्ते पर उठे सवालों का है।
सूत्रों के मुताबिक, एक अधिकारी को ज़मीन सीधे नहीं, बल्कि अपने सबसे करीबी रिश्तेदार के नाम रजिस्ट्री कराकर दी गई।
सूत्रों ने दावा है कि यह सौदा सरकारी काम के एवज में हुआ।
ज़मीन को ‘गिफ्ट’ बताया जा रहा है, लेकिन इसकी टाइमिंग और प्रक्रिया कई सवाल खड़े कर रही है।
कागज़ों में सब साफ, लेकिन नीयत पर दाग?
अब पूरे मामले को लेकर जांच की तैयारी तेज़ है।
EOW तक शिकायत पहुंचने की चर्चा से ही प्रशासनिक गलियारों में बेचैनी है।
👉 क्या ‘गिफ्ट’ की आड़ में हुआ खेल?
👉 क्या जांच में खुलेगा सिस्टम का सच?
मिश्रा जी की कलम से 🖊️...9575560069

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