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हटकेसर में ही बनेगा नालंदा परिसर — विकास बनाम विरोध, अब फैसला जनता के हाथ

रायपुर -धमतरी में नालंदा परिसर को लेकर चल रही बहस अब निर्णायक मोड़ पर है। सवाल साफ़ है—जब शहर के युवाओं के भविष्य की नींव रखी जा रही है, तो विरोध का औचित्य क्या है? हटकेसर की जिस ज़मीन पर नालंदा परिसर आकार लेने वाला है, वही ज़मीन आज चर्चा का केंद्र बनी हुई है। शहर पूछ रहा है—विरोध विकास का है या किसी और स्वार्थ का?

प्रशासन की दो-टूक: कोई भ्रम नहीं

नगर निगम और जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट कर दी है महापौर रामू रोहरा और कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने साफ़ कहा है कि नालंदा परिसर हटकेसर में ही बनेगा प्रशासन के मुताबिक, सभी तकनीकी, कानूनी और ज़मीन संबंधी औपचारिकताएँ पूरी की जा चुकी हैं हटकेसर का चयन पर्याप्त भूमि, बेहतर कनेक्टिविटी और विद्यार्थियों के अनुकूल वातावरण के कारण किया गया है।

विरोध की असल वजह क्या?

शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि विरोध के पीछे शिक्षा या जनहित नहीं, बल्कि कुछ लोगों के निजी हित हैं। आरोप है कि अतिक्रमण और व्यक्तिगत लाभ बचाने के लिए परियोजना को बाधित करने की कोशिशें हो रही हैं। जनता अब यह समझने लगी है कि हर विकास परियोजना के सामने खड़े होने वाली वही पुरानी मानसिकता फिर सक्रिय है।

युवाओं के लिए गेम-चेंजर

नालंदा परिसर सिर्फ़ एक भवन नहीं—यह धमतरी के युवाओं के सपनों का प्लेटफॉर्म है। यहाँ अत्याधुनिक लाइब्रेरी, डिजिटल स्टडी ज़ोन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधुनिक संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय छात्रों को बड़े शहरों की ओर पलायन किए बिना बेहतर अवसर मिलेंगे।

समर्थन में खड़ा शहर

शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और अभिभावकों का एकमत है—विकास का विरोध भविष्य के साथ समझौता है। हटकेसर में नालंदा परिसर धमतरी के लिए ऐतिहासिक अवसर है, जिसे हाथ से जाने देना नासमझी होगी।

निष्कर्ष:

बहस से आगे बढ़कर अब अमल का समय है। प्रशासन की स्पष्टता, जनसमर्थन और युवाओं की उम्मीदें—सब एक दिशा में इशारा कर रही हैं। नालंदा परिसर हटकेसर में बनेगा, और धमतरी शिक्षा के नए अध्याय की ओर कदम बढ़ाएगा।

मिश्रा जी की कलम से 🖊️..9575560069

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