कथा के दौरान गिरी बापू जी महाराज ने भगवान भोलेनाथ की दिव्य और मनोहारी लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा—
“जिनके मुख से ‘ॐ नमः शिवाय’ का उच्चारण होता है, उनके मुख का दर्शन करने मात्र से गंगा स्नान का पुण्य प्राप्त होता है।”
उनकी इस वाणी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
बापू जी ने सिहावा की धरती को महर्षि श्रृंगी की पावन तपोस्थली बताते हुए इसे एक महान तीर्थ भूमि कहा। उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि वे स्वयं भी ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का नियमित जाप करें और अपने बच्चों को भी यह महामंत्र अवश्य दें।
उन्होंने भावुक स्वर में कहा—
“जो बच्चा ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करता है, वह जीवन में असंभव को भी संभव कर सकता है, आसमान का तारा तोड़ने में समर्थ बन सकता है।”
इस अवसर पर जीनियस पब्लिक स्कूल, नगरी के लगभग 100 स्कूली बच्चों ने दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक लगातार कथा श्रवण कर आध्यात्मिक रसपान किया। बच्चों की एकाग्रता और श्रद्धा ने पूरे पंडाल को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जीनियस पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर मोहन सोनी ने कहा कि
“यदि महाराज जी की वाणी का एक भी विचार इन बच्चों के मन में बैठ गया, तो हम स्वयं को कृतार्थ समझेंगे। यह संस्कार इनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनेगा।”
कर्णेश्वर सिहावा की पावन धरती पर चल रही यह शिव महापुराण कथा न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति दे रही है, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कार, साधना और शिव भक्ति से जोड़ने का कार्य भी कर रही है।
मिश्रा जी की कलम से 🖊️....

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