रायपुर -छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी ब्लॉक का एक गांव ऐसा भी है जहां आज भी सदियों पुरानी परंपराएं महिलाओं की जिंदगी तय करती हैं यह गांव है संदबाहरा… जहां सुहागिन महिलाएं मांग में सिंदूर नहीं भरती, कोई श्रृंगार नहीं करतीं और सबसे हैरान करने वाली बात यह कि वे खाट या कुर्सी पर भी नहीं बैठतीं इतना ही नहीं, गांव की महिलाएं खेतों में धान की कटाई का काम भी नहीं करतीं परंपरा इतनी सख्त है कि पीढ़ियों से गांव की महिलाएं इन नियमों का पालन करती आ रही हैं।
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गांव की परंपरा क्या कहती है-
ग्रामीणों के मुताबिक यह परंपरा गांव के देवी-देवताओं और मान्यताओं से जुड़ी हुई है माना जाता है कि अगर महिलाएं इन नियमों को तोड़ती हैं तो गांव में अनहोनी या प्राकृतिक आपदा आ सकती है इसी डर और आस्था के कारण यहां की महिलाएं आज भी इन परंपराओं का पालन करती हैं।
महिलाओं पर लागू प्रमुख नियम-
सुहागिन होते हुए भी महिलाएं मांग में सिंदूर नहीं भरतीं
श्रृंगार नहीं करतीं
खाट या कुर्सी पर बैठना मना है
धान की कटाई में हिस्सा नहीं लेतीं
सीढ़ी पर चढ़कर काम नहीं करने मनाही है
ग्रामीण क्या कहते हैं-
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और गांव की पहचान बन चुकी है उनका मानना है कि इन नियमों के कारण गांव में देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है और गांव सुरक्षित रहता है।
बदलते समय के साथ सवाल-
हालांकि बदलते समय में शिक्षा और जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ इस परंपरा पर सवाल भी उठने लगे हैं।कुछ लोग इसे महिलाओं की स्वतंत्रता से जोड़कर देखते हैं, तो कुछ इसे गांव की सांस्कृतिक पहचान मानते हैं।
मिश्रा जी की कलम से 🖊️....9575560069


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